शनिवार, 20 जून 2009

उप्र पुलिस ने डाकू मारा मप्र सरकार ने इनाम बढाया

उप्र पुलिस ने विंध्य क्षेत्र के दुर्दांत डकैत घनश्याम पटेल को मार गिराया। हालांकि उसे मारने मंे पुलिस के जवानों को शहादत देना पडी। एक डकैत को मारने के लिए पुलिस को जो मशक्कत करना पडी उससे जाहिर है कि डाकू पुलिस पर क्यों भारी पडते हैं। विंध्य क्षेत्र में भले ही वह मप्र का इलाका हो या उप्र का डाकुओं को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है, वही उनकी शक्ति का स्त्रोत भी है। खैर हम यहां डाकुओं को नेताओं के संरक्षण की बात केवल संदर्भ के बतौर कर रहे हैं, इस पर पूरी बात पिफर कभी सही। अभी तो हम बात कर रहे हैं घनश्याम पटेल की मौत होने के बाद मप्र पुलिस को भी होश आया। उसने सतना जिले के बिछियन गांव में तीन महीने पहले हुए नरसंहार के सूत्रधार सुंदर पटेल पर शुक्रवार को इनाम 25 हजार रूपए से बढाकर एक लाख रूपए कर दिया। तीन महीने पहले इस डाकू पर महज 10 हजार रूपए इनाम था। नरसंहार के बाद इनाम ढाई गुना हुआ और अब उप्र पुलिस ने जब घनश्याम का सफाया कर दिया तो मप्र सरकार ने सुंदर पटेल का रूतबा बढाकर इनाम सीधा चार गुना और बढा दिया। सुंदर पटेल न केवल बिछियन नरसंहार के पीछे है बल्कि वह विंध्य इलाके में आतंक का पर्याय बन रहा है। काबिल गौर बात यह है कि सुंदर पटेल मीडिया को उपलब्ध है, लेकिन पुलिस उसे तलाश नहीं पा रही है। सरकार पुलिस की बात मानकर इनाम बढाने को ही अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ रही है। सुंदर पटेल कई दफा अपने मोबाइल नंबर से मीडिया के लोगों से लंबी लंबी बातें कर चुका है। क्या मोबाइल के जरिए उसकी लोकेशन पता नहीं की जा सकती! आखिर निर्भय गुर्जर को भी तो मोबाइल प्रेम के कारण ही मारा गया था। लेकिन यह कारनामा भी उप्र पुलिस ने किया था। मप्र सरकार के मुखिया शिवराज ंिसंह चैहान अपने पांच साल की उपलब्धियों में डकैतों के सफाये को भी गिनाते हैं, लेकिन सुंदर पटेल न केवल जिंदा है बल्कि सरकार को उस पर ईनाम बढाना पड रहा है। मप्र में तीन दिन पहले राजधानी भोपाल में हुए गैंग रैप की वारदात के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक तथा अन्य अफसरों को बुलाकर डांट लगाई है। देखना ये है कि डांट का कितना असर होता है। उम्मीद की जाना चाहिए कि मप्र पुलिस भी उप्र पुलिस की ही तरह सख्ती दिखाकर डकैतों का सफाया कर डालेगी।

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