गुरुवार, 12 नवंबर 2009

कैसा रहम, ये माफी है नाकाफी. .

भरी विधानसभा में राष्ट्रभाषा का भरपूर अपमान करने वाले महाराष्ट्र विनाश सेना के 13 विधायकों के नेता नांदगांवकर ने अब अपने गिरोह के चार निलंबित सदस्यों की सजा खत्म करने या उसे कम करने की गुहार लगाते हुए घटना पर खेद जताया है। यह तो ठीक वैसा ही है कि जानबूझकर सुनियोजित और बकायदा घोषणा कर अपराध करो और फिर माफी की उम्मीद भी कर डालो। इन चार सदस्यों का निलंबन तो कतई खत्म किया ही नहीं जाना चाहिए, बल्कि बाकी नौ से यह लिखित आश्वासन लेना चाहिए कि वे इस किस्म की कोई हरकत नहीं करेंगे, तो न केवल सदस्यता खत्म कर दी जाए बल्कि उन्हें कानूनन जो सजा मुकर्रर हो वो दी जाए। क्योंकि सदन में किए गए किसी भी जुर्म पर अदालत का कानून नहीं सदन के नियम प्रक्रिया और परंपरा चलती है। महाराष्ट्र में हर दल और नेता मराठी भाषा, मराठी माणुस को वोट मिलने और उसकी अवहेलना पर वोट खिसकने का सूचकांक मानता है। असल में महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार को इन विधायकों के कुकृत्य पर बकायदा आपराधिक प्रकरण उनके मुखिया राज ठाकरे के खिलाफ दर्ज कराना चाहिए। राज का सभी विधायकों को खुला पत्र इस बात का सुबूत है कि उसी के उकसावे पर महाराष्ट्र विधानसभा में शर्मनाक वाकया पेश आया। राज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के अलावा उसकी पार्टी की मान्यता खत्म करने की प्रक्रिया भी शुरू होना चाहिए, तभी न केवल नजीर कायम होगी बल्कि अन्य किसी और राज्य में इस किस्म की गुंडागर्दी राजनीति को प्रश्रय मिल पाएगा। राज ठाकरे को शायद इस बाद का सही ढंग से इल्म भी नहीं होगा कि देश भर में फैले मराठियों की क्या स्थिति बन सकती है। मैंने गुरूवार को भोपाल में एक दफ्तर में एक पढ़े लिखे शख्स को अपने साथियों को परिहास में यह कहते सुना कि अपन लोगों को भी मराठियों को पीटना चाहिए। यह बात मजाक में कही गई थी। लेकिन मजाक में भी ऐसी बात जेहन में आना खतरनाक है, क्योंकि राज ठाकरे एंड कंपनी गैर मराठियों के दिमाग में भी फितूर पैदा करें, यह देश के लिए खतरनाक है। समूचे देश के तमाम राज्यों को भले ही वहां की भाषा, बोली कुछ भी हो, देश की बाकी बोलियां बोलने वाले लोगों की चिंता कर ही लेना चाहिए। यह हम सबका न केवल दायित्व है, बल्कि समय की मांग भी है।

8 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

समरथ को नहि दोष गुसाईं
बस यही कहूँगा

अंशुमाली रस्तोगी ने कहा…

यह भाषा की नहीं राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई है।

Praveen Aliya ने कहा…

abhi tak saja sarkar dwara koi nahi dee ja rahi hai yeh rastbhasha ka apman hai. Hindi hum sab ki matra bhasha hai raj ko maf nahi karna chhiye.

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी यह हिन्दी मराठी की ल्डाई नही, दो गुंडो की आपसी दुशमनी है, केन्द्र सरकार हाथो मे चुडिया पहन कर क्यो छ्क्को की तरह चुप बेठी है?अब तक राज ठाकरे को अंदर होना चाहिये था

बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

It will be dangerous too if marathi people joke about that they will beat m.p guys(who are there in lakhs) in maharashtra if they categorise us m.pians with up beharis, it will be bad joke. Sikkim guj. and south india is already with them silently on anti migration stand. Even our CM also said the same anti migration thing. Regards