गुरुवार, 1 जुलाई 2010

शिवराज को ये किस मुसीबत में फंसा गए अनंत..

कुछ बातें कहने सुनने में अच्छी लगती हैं लेकिन अमल में नहीं लाई जातीं। अर्थात हाथी के दांत.. वाली कहावत। मप्र में भाजपा की सरकार में मंत्रियांे की दादागिरी, उनके खिलाफ दर्ज हो रहे भ्रष्टाचार के इतर मामलों की जैसे बाढ आई हुई है। ऐसे में महासचिव अनंत कुमार की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह सीख कि दागियांे को बाहर करो, सुनने में अटपटी ही लग रही है। क्योंकि खुद मुख्यमंत्री पर डंपर खरीदी मामले में गलत जानकारियां देने और फिर स्वीकार कर लेने का मामला है। यह मामला तब उमा भारती के सिपहसालार प्रहलाद पटेल ने उठाया था, जो शिवराज से मित्रता के चलते कभी के भाजपा में लौट आए हैं और अब इस मामले में चुप हैं। खैर शिवराज दागियों पर कार्रवाई करें तो कैसे। एक तो वे खुद आरोपों से घिर चुके हैं, दूसरे दागी श्रेणी के मंत्रियों की पूरी फौज है। विश्नोई हटाए ही इसीलिए गए थे लेकिन वे फिर मंत्री बना लिए गए, हाइकमान के इशारे पर ही। नरोत्तम मिश्रा भी इसीलिए दूसरी पारी में पहले मंत्री नहीं बनाए गए थे, लेकिन बाद में न केवल मंत्री बन गए बल्कि इस वक्त वे शिवराज सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता और संसदीय, विधि विधायी के अलावा आवास एवं पर्यावरण विभाग के आधे हिस्से आवास के भी मंत्री हैं। कैलाश विजयवर्गीय भले लाख आरोपों से घिरे हों लेकिन वे भी शिवराज के प्रिय हैं, हाल ही में 11 दिन की विदेश यात्रा में साथ रहे। जयंत मलैया भी लोकायुक्त में आरोपित हैं लेकिन उनके पास जलसंसाधन और आवास पर्यावरण विभाग है। नागेंद्र सिंह और अनूप मिश्रा अपने परिजनों की हिंसक दादागिरी के चलते निशाने पर हैं। बाबूलाल गौर भी पटवा सरकार के वक्त नगरीय प्रशासन मंत्री रहते जमीनों के मामले में चर्चा में रहे थे, उनके खिलाफ जगत्पति कमेटी ने प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं, लेकिन वे मुख्यमंत्री तक बन चुके हैं, अब भी मंत्री हैं और उनकी पुत्रवधु भोपाल की महापौर हैं। विजय शाह आरोपों के चलते पहले तो दोबारा मंत्री नहीं बनाए गए थे और बाद मैं न केवल मंत्री बने, उनकी पत्नी खंडवा से महापौर बनीं। लुब्बे लुआव ये कि शिवराज दागियों पर कार्रवाई करें तो आखिर कैसे। रही बात कांग्रेस की तो उसकी सरकार के वक्त में दागियों की पूरी फौज थी। अर्जुन सिंह गैस कांड मामले में एंडरसन की सुरक्षित वापसी मामले में बुरी तरह से घिरे हैं, जिसकी आंच राजीव गांधी के घराने अर्थात कांग्रेस आला हाईकमान तक को झुलसा रही है। ऐसे में जनता किस पर विश्वास करे, अनंत कुमार पर, शिवराज पर, दागियों पर, कांग्रेेसियों पर या ईश्वर पर ही जो कि इकलौता सहारा है गरीब जनता का। मनमोहन सरकार लगातार महंगाई को परवान चढा रही है और बाकी सब सरकारें भी कमोबेश जनता के साथ यही कर रही हैं। सरकारें चलाने वाले अगर दागी बनने में रूचि लेने के बजाय जनता का वाकई कल्याण करते होते तो नक्सलियों को सहयोग और पांव जमाने का मौका क्यांेकर मिल पाता।

3 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

nice

राज भाटिय़ा ने कहा…

सब चोर उच्चके इकट्टे है

Neeraj ने कहा…

chor-chor Mousere Bhai, Ek Bhai Dusre Bhai ke sath Bura kaise kar sakta hai.
Is Hamam mai Sab Nange