रविवार, 7 मार्च 2010

क्या क़तर में न्युड बना पाएंगे मकबूल मियां


कतर के नागरिक और अप्रवासी भारतीय हो गए एमएफ हुसैन को लेकर इन दिनों पूरे देश में और अंतरराष्टीय कला जगत में चर्चा है। हमारे मप्र में इंदौर में जन्मे पले बढ.े मकबूल भाई ने जो कदम उठाया है, उसके समर्थन में अब तक तो किसी ने कोई बयान नहीं दिया है। क्योंकि उन्होंने कतर जैसे देश की नागरिकता ली है, जो उनके जैसे स्वच्छंद पेंटर के विचारों वाला देश तो कतई नहीं है। वे फ्रांस, जर्मनी या अमेरिका की नागरिकता पा लेते तो बात समझ में भी आती। क्योंकि वहां चित्रकार की स्वतंत्रता और काफी हद तक समर्थन मिलता है लेकिन कतर! जाहिर है वे वहां वो सब नहीं कर पाएंगे जिसकी वजह से वे मकबूल हुए हैं। उन्हें सेलिब्रिटी पेंटर भारत की जनता ने ही बनाया और माना है, जाहिर है भारत कोई अनडेमोक्रेटिक और कटटर मुल्क नहीं है इसीलिए यह संभव हो पाया। कटटर पंथी और प्रतिक्रियावादी किस देश में नहीं होते सो भारत में भी हैं, और उन्हें भी विरोध का हक है। हुसैन ने सरस्वती, दुर्गा और भारतमाता को जिस ढंग से चित्रित किया और अपनी खुद की मां की जो तस्वीर बनाईं उनका फर्क लोगों की नाराजगी की मूल वजह है। देवी देवताओं को नग्न चित्रित करना और मां को सहज चित्रित करने की बात लोगों को दोगलापन लगी, और उन्होंने गलत तरीके से विरोध किया। इन तरीकों का न तो मुखयधारा का भारतीय समाज समर्थन करता है और न ही कानून। तो फिर इंदौर के मकबूल फिदा हुसैन क्या हासिल करने कतरी हो गए! विरोध शाहरूख खान का भी हुआ और सचिन तेंदुलकर को भी फतवे सुनाए गए लेकिन पूरा देश इन सेलिब्रिटी के साथ उठ खड.ा हुआ, फतवे कूड.ा हो गए। इस देश में कटटरपन ज्यादा नहीं चलता, यह बात कभी जलालुददीन मोहम्मद अकबर ने समझी थी, भाजपा ने थोडा बहुत समझने की चेष्टा की है, शिवसेना और उसी कुनबे के राज ठाकरे खुद को खत्म करने की तरफ बढ रहे हैं। मकबूल भाई ने सरस्वती और दुर्गा को जिस ढंग से चित्रित किया था उससे मेरे जैसे करोडों लोग अप्रसन्न हुए थे लेकिन हम लोग ठाकरे या ऐसे ही किसी कटटरपंथी के साथ नहीं हैं, कानून अपना काम करेगा। मकबूल मियां को यहां वापस लौटकर कानून के निजाम को मानना चाहिए था, कटटरपंथी न शाहरूख का कुछ कर पाए और न वे हुसैन का कुछ कर पाएंगे।

2 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

कतर मै हो या फ़िर किसी दुसरे देश मै सुयर तो सुयर ही रहेगा

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

क़तर में फिर से घोड़े बनाया करेंगे ...या फिर ऊंट